मंगोलपुरी में केजरीवाल का बेड़ा गर्क

0
139

चुनावी डेस्क- जब किसी व्यक्ति को राजनीतिक दौड़ में पहली बार में सफलता हासिल हो जाती है. तो वह अपने आप को बड़ा तुर्रम खां समझने लगता है. अरविंद केजरीवाल के बीते 5 साल में बदले व्यवहार से तो यही नजर आता है.

 

लिहाजा राजनीति में एक मशहूर कहावत है. “पब्लिक सब जानती है” ऐसे में अगर किसी को यह लगता है. केवल 5 साल की सत्ता पाकर हमेशा के लिए अजय हो गया है. तो यह उसकी सबसे बड़ी भूल होगी. लेकिन अब अरविंद केजरीवाल को ही देख लीजिए. जिन लोगों के साथ दिल्ली की सत्ता पर काबिज हुई फिर एक-एक कर योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण, कुमार विश्वास, आशुतोष सबको किनारे करते चले गए. और तो और अपने गुरु अन्ना हजारे तक को नहीं बख्शा.

 

ऐसे में विपक्ष मुद्दा बना रहा है कि जो व्यक्ति अपने राजनीतिक गुरु का ना हुआ. वह दिल्ली का क्या होगा. मुफ्त की योजनाओं के आश्रय सत्ता पाना आसान नहीं होगा. क्योंकि पब्लिक जानती है. जब भी कोई महत्वपूर्ण संसाधन खत्म होता है. तो उसका सबसे बड़ा मूल्य भी गरीब तबके के लोगों को चुकाना होता है. ऐसे में मुफ्त वाली योजनाएं जीत के लिए कम कारगर नजर आती है.

 

बरहाल मौजूदा समीकरणों को देखते हुए मंगोलपुरी में आम आदमी पार्टी के दिन लद गए है. ऐसा नजर आता है आम आदमी पार्टी के इस हश्र के पीछे अरविंद केजरीवाल की छोटी सोच और 5 साल आपसे कलह में बिताने के कारण आज यह हालात बन पड़े है. 8 फरवरी को दिल्ली में मतदान है और उसी दिन जनता तय करेगी कि 11 फरवरी को नतीजे क्या होंगे.

Leave A Reply

Please enter your comment!
Please enter your name here