बवाना की जनता ने आप को चुनावों में मज़ा चखाने की ठानी !

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चुनावी डेस्क- कम से कम भारत में किसी राजनीतिक दल को यह भ्रम नहीं होना चाहिए, कि वह सदा सत्ता में बने रहेंगे। भारतीय लोकतंत्र की बड़ी खूबसूरती यह है, कि वह आपको हर 5 साल बाद पुनर्विचार करने का, सोचने का, समझने का मौका देता है। आपकी पहले की भूल को सुधारने का अवसर देता है।

 

लिहाजा हर 5 साल बाद चुनाव होता है। कई बार आप विज्ञापनों की आड़ में भावनाओं में बहकर अपने मत का दुरुपयोग कर लेते और इसका खामियाजा आपको अगले 5 साल तक भुगतना होता है। इन दिनों दिल्ली में विधानसभा चुनाव है। हर राजनीतिक दल अपनी जीत हार की उधेड़बुन में लगा है।

 

वहीं दिल्ली के बवाना विधानसभा इलाके में केजरीवाल सरकार की 5 साल की नाकामियां नजर आती है। जहां विज्ञापनों में बहुत बड़े-बड़े दावे हुए। लेकिन जमीन पर सब कुछ अस्त-व्यस्त है। नकारापन का सन्नाटा पसरा है।

 

जहां सीवरेज का काम आधा अधूरा है। ढक्कन खुले पड़े है। मक्खियां और बीमारियों का हर तरफ आलम है। बदबू से जीना बेहाल हो चुका है।लोग अब धीरे धीरे दिल्ली से बाहर पलायन करने लगे है। लेकिन केजरीवाल सरकार लोकलुभावन और आखिरी 6 महीने में चुनाव जीतने की तिकड़म में लगातार व्यस्त है।

 

वहीं मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो हर घर में सीवरेज से पैदा हुई बीमारी से ग्रसित एक व्यक्ति जरूर मिलेगा। जो इस बात की ओर इशारा करता है कि अगर आप दिल्ली में रह रहे है। मतलब आपकी जिंदगी के 5 साल कम कर रहे है। हालांकि केजरीवाल नारा बुलंद कर रहे है, फिर 5 साल केजरीवाल। लेकिन आमजन के लिए यह डरने वाली बात है। हालांकि केजरीवाल सरकार अपनी महिमामंडन के बीच इन सब बातों को सिरे से खारिज करती है। लेकिन जमीनी सच्चाई यही है।

 

राजनीतिक जानकार कहते है। केजरीवाल सरकार की बुनियादी सुविधाओं को लेकर रही लापरवाही उनके अनुभव कि कमी और भष्टाचार के बोलबाले की और इशारा करती है। वहीं विपक्ष के लिए चुनाव में बड़ा हथियार बन रही है। इसके चलते 2020 के विधानसभा चुनाव के परिणाम हैरान करने वाली हो सकते है। बवाना के स्थानीय लोगों में आम आदमी पार्टी के खिलाफ जो विरोध है। वह केजरीवाल के दिल्ली फतह के सपने को चकनाचूर कर सकता है। फिर सबको 11 फरवरी के नतीजों का इंतजार रहेगा।

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